कांचहि बांस केर गहबर / मैथिली लोकगीत

कांचहि बांस केर गहबर
आहे सोबरन लागल केबाड़
ताही मे सँ निकलय सुरुजमनि
आहे कोने दाइ उखम डोलाउ
अरघक बेर भेल हे
भिनसरक पहरमे डोमिन बेटी हे
बेटी घनी दउरिया लऽ आउ
अरधक बेर भेल हे
बेटी पियरे कनसुपती लय आउ
पुरुब रंथी ठाढ़ भेल हे
भिनसरक पहरमे बनिआइन बेटी हे
बेटी धनी सुपारी लय आउ
अरघक बेर भेल हे
भिनसरक पहरमे तोहें मालिन बेटी हे
बेटी धनी सतरंगा फुल-हार लय आउ
अरधक बेर भेल हे
भिनसरक पहरमे तोहें ब्राह्मण देव हे
ब्राह्मण पियरे रंग जनउआ लय आउ
अरधक बेर भेल हे

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