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यानि कानि च मित्राणि / श्लोक

यानि कानि च मित्राणि, कृतानि शतानि च । पश्य मूषकमित्रेण , कपोता: मुक्तबन्धना: ॥ जो कोई भी हों , सैकडो मित्र बनाने चाहिये । देखो, मित्र चूहे की सहायता से कबूतर (जाल के) बन्धन से मुक्त हो गये थे ।

बहुभिर्प्रलापैः किम् / श्लोक

बहुभिर्प्रलापैः किम् , त्रयलोके सचरारे । यद् किंचिद् वस्तु तत्सर्वम् , गणितेन् बिना न हि ॥ बहुत प्रलाप करने से क्या लभ है ? इस चराचर जगत में जो कोई भी वस्तु है वह गणित के बिना नहीं है / उसको गणित के बिना नहीं समझा जा सकता

यथा शिखा मयूराणां / श्लोक

यथा शिखा मयूराणां , नागानां मणयो यथा । तद् वेदांगशास्त्राणां , गणितं मूर्ध्नि वर्तते ॥ जैसे मोरों में शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे उपर है, वैसे ही सभी वेदांग और शास्त्रों मे गणित का स्थान सबसे उपर है ।

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् / श्लोक

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् । प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् , एष धर्मः सनातन: ॥ सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये । प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये ; यही सनातन धर्म है ॥

असतो मा सदगमय / श्लोक

असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥ (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले चलो । अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो ।। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥।

शांताकारम भुजंगशयनम / श्लोक

शांताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशम् । विश्‍वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम् । लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ज्ञानगम्यम् । वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम् ॥

या कुन्देंदु तुषारहार / श्लोक

या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रव्रिता | या वीणा वरा दंडमंडित करा या श्वेत पद्मासना || या ब्रह्मच्युत शंकरा प्रभुतिभी देवी सदा वन्दिता | सामा पातु सरस्वती भगवती निशेश्य जाड्या पहा ||

या देवी सर्वभूतेषु / श्लोक

या देवी सर्वभुतेषू विष्णु मायेती शब्दिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधियते नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभुतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभुतेषु निद्रारुपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः या देवी सर्वभुतेषु क्षुधारुपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

विश्वेश्वराय वरदाय / श्लोक

विश्वेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय , लंबोदराय सकलाय जगध्दिताय। नागाननाय श्रुतियग्यविभुसिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥