गौरी बर अएला अलख लखिया, चलू देखू सखिया / मैथिली लोकगीत

गौरी बर अएला अलख लखिया, चलू देखू सखिया
हे बर के ने माय-बाप कुल-जतिया, भूत ओ प्रेत संग बरियतिया
बसहा चढ़ल बर संग भरिया, बर के सुरति देखि फाटे छतिया
नारद कएलनि अजगुत सखिया, हे फेरू-फेरू बर-बरियतिया
भनहि विद्यापति सुनू सखिया, इहो थिका दानवीर त्रिभुवन पतिया
चलू देखू सखिया, गौरी बर लयला अलख लखिया

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