Thursday, December 19, 2024

आँखों से हया टपके है अंदाज़ तो देखो Aankhon Se Haya Tapke Hai Andaaz To Dekho Momin Khan Momin Ghazal

आँखों से हया टपके है अंदाज़ तो देखो
है बुल-हवसों पर भी सितम नाज़ तो देखो
उस बुत के लिए मैं हवस-ए-हूर से गुज़रा
इस इश्क़-ए-ख़ुश-अंजाम का आग़ाज़ तो देखो
चश्मक मिरी वहशत पे है क्या हज़रत-ए-नासेह
तर्ज़-ए-निगह-ए-चश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़ तो देखो
अरबाब-ए-हवस हार के भी जान पे खेले
कम-तालई-ए-आशिक़-ए-जाँ-बाज़ तो देखो
मज्लिस में मिरे ज़िक्र के आते ही उठे वो
बदनामी-ए-उश्शाक़ का एज़ाज़ तो देखो
महफ़िल में तुम अग़्यार को दुज़-दीदा नज़र से
मंज़ूर है पिन्हाँ न रहे राज़ तो देखो
उस ग़ैरत-ए-नाहीद की हर तान है दीपक
शो’ला सा लपक जाए है आवाज़ तो देखो
दें पाकी-ए-दामन की गवाही मिरे आँसू
उस यूसुफ़-ए-बेदर्द का ए’जाज़ तो देखो
जन्नत में भी ‘मोमिन’ न मिला हाए बुतों से
जौर-ए-अजल-ए-तफ़रक़ा-पर्दाज़ तो देखो

 

 

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