Wednesday, March 7, 2018

तुम्हें गीतों में ढालूंगा सावन को आने दो / सावन को आने दो

तुम्हें गीतों में ढालूँगा
तुम्हें गीतों में ढालूँगा
सावन को आने दो ...

झूलों की होंगी कतारें
फूलों की होंगी बहारें
सरगम की लय पे भँवरें
कलियों का घूँघट उतारें
सपने जगा लूँगा
तुम को तुम्हीं से मैं
इक दिन चुरा लूँगा
- कब?
सावन को आने दो ...

देखो ये शान हमारी
हम हैं पवन के पुजारी
धरती गगन के मिलन की
आरती हमने उतारी
अब मैं न मानूँगा
इस दिल के दर्पण में
तुम को सजा लूँगा
- कब?
सावन को आने दो ...

बादल से रस रंग बरसे
प्यासा मन काहे को तरसे
कहती है बरखा दीवानी
गोरी सिमट नहीं डर से
अपना बना लूँगा
दिल में बसा लूँगा
सीने से लगा लूँगा
- कब?
सावन को आने दो ...

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