Tuesday, March 6, 2018

शाम है धुआँ धुआँ - Shaam Hai Dhuaan Dhuaan -Diljale

Movie/Album: दिलजले (1996)
Music By: अनु मलिक
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: अजय देवगन, पूर्णिमा

शाम है धुआँ धुआँ
जिस्म का रुआँ रुआँ
उलझी-उलझी साँसों से
बहकी-बहकी धड़कन से
कह रहा है आरज़ू की दास्ताँ
शाम है धुआँ धुआँ...

आरज़ू झूठ है, कहानी है
आरज़ू का फरेब खाना नहीं
खुश जो रहना हो ज़िन्दगी में तुम्हें
दिल किसी से कभी लगाना नहीं

मेरे दिल पे जो लिखा है, वो तुम्हारा नाम है
मेरी हर नज़र में जाना, तुमको सलाम है
मुझको तुमसे प्यार है, प्यार है
गूंजते हैं मेरे प्यार से ये ज़मीन आसमां
शाम है धुआँ धुआँ...

क्यों बनाती हो तुम रेत के ये महल
जिनको एक रोज़ खुद ही मिटाओगी तुम
आज कहती हो इस दिलजले से प्यार है तुम्हें
कल मेरा नाम तक भूल जाओगी तुम

तुम्हें क्यों यकीन नहीं है, के मैं प्यार में हूँ गुम
हो मेरे ख़्वाबों में तुम्हीं हो, मेरे दिल में तुम ही तुम
मुझको तुमसे प्यार है, प्यार है
प्यार में निसार हो गए मेरे जिस्म और जान
शाम है धुंआ...

एक पल में जो आकर गुज़र जाता है
ये हवा का वो झोंका है और कुछ नहीं
प्यार कहती है ये सारी दुनिया जिसे
एक रंगीन धोखा है और कुछ नहीं

No comments:

Post a Comment

Featured post

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो Yunhi Be-Sabab Na Fira Karo Koi Bashir Badr Ghazal

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक स...