Monday, March 5, 2018

Tere Khayal Ki Aab-O-Hawa Mein Jeete Hain Lyrics / तेरे ख़याल की आब-ओ-हवा में जीते हैं

ख़ुमार-ए-ग़म है महकती फ़िज़ा में जीते हैं
तेरे ख़याल की आब-ओ-हवा में जीते हैं

बड़े तपाक से मिलते हैं मिलनेवाले मुझे
वो मेरे दोस्त हैं तेरी वफ़ा में जीते हैं

फ़िराक़-ए-यार में साँसों को रोके रखते हैं
हर एक लम्हा गुज़रती कज़ा में जीते हैं

ना बात पूरी हुई थी के रात टूट गई
अधूरे ख़्वाब की आधी सज़ा में जीते हैं

तुम्हारी बातों में कोई मसीहा बसता है
हसीं लबों से बरसती शफ़ा में जीते है

Tere Khayal Ki Aab-O-Hawa Mein Jeete Hain Lyrics

Khumaar-e-gam hai mahakati fiza men jite hain
Tere khayaal ki ab-o-hawa men jite hain

Bade tapaak se milate hain milanewaale mujhe
Wo mere dost hain teri wafa men jite hain

Firaaq-e-yaar men saanson ko roke rakhate hain
Har ek lamha guzarati kaza men jite hain

Na baat puri hui thi ke raat tut gi
Adhure khwaab ki adhi saza men jite hain

Tumhaari baaton men koi masiha basata hai
Hasin labon se barasati shafa men jite hai
गीतकार : गुलज़ार, गायक : जगजीत सिंग, संगीतकार : जगजीत सिंग, गीतसंग्रह/चित्रपट : लीला (२००२) / Lyricist : Gulzar, Singer : Jagjit Singh, Music Director : Jagjit Singh, Album/Movie : Leela (2002)

No comments:

Post a Comment

Featured post

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो Yunhi Be-Sabab Na Fira Karo Koi Bashir Badr Ghazal

यूँही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक स...