Ya Rabba – Salaam-E-Ishq
Movie: Salaam-E-Ishq
Year: 2007
Director: Nikhil Advani
Music: Shankar-Ehsaan-Loy
Lyrics: Sameer
Singers: Kailash Kher
प्यार है या सज़ा, ए मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला
इस प्यार में हो कैसे कैसे इम्तिहान
ये प्यार लिखे कैसी कैसी दास्तान
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो हो हो प्यार है या सज़ा, ए मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला
कैसा है सफ़र वफ़ा की मंजिल का
ना है कोई हल दिलों की मुश्किल का
धड़कन धड़कन बिखरी रंजिशें
सांसें सांसें टूटी बंदिशें
कही तो हर लम्हा होंटों पे फ़रियाद है
किसी की दुनिया चाहत में बर्बाद है
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
कोई ना सुने सिसकती आँहों को
कोई ना धरे तड़पती बाहों को
आधी आधी पूरी ख्वैशें
टूटी फूटी सब फरमाइशें
कहीं शक हैं कहीं नफरत की दीवार है
कहीं जीत में भी शामिल पलपल हार हैं
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो ओ ओ प्यार है या सज़ा, ए मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
ना पूछो दर्द बन्दों से
हंसी कैसी ख़ुशी कैसी
मुसीबत सर पे रहती हैं
कभी कैसी कभी कैसी
हो ओ ओ ओ रब्बा, रब्बा हो ओ ओ हो
रब्बा हो ओ ओ हो, हो ओ ओ ओ रब्बा
Year: 2007
Director: Nikhil Advani
Music: Shankar-Ehsaan-Loy
Lyrics: Sameer
Singers: Kailash Kher
प्यार है या सज़ा, ए मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला
इस प्यार में हो कैसे कैसे इम्तिहान
ये प्यार लिखे कैसी कैसी दास्तान
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो हो हो प्यार है या सज़ा, ए मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला
कैसा है सफ़र वफ़ा की मंजिल का
ना है कोई हल दिलों की मुश्किल का
धड़कन धड़कन बिखरी रंजिशें
सांसें सांसें टूटी बंदिशें
कही तो हर लम्हा होंटों पे फ़रियाद है
किसी की दुनिया चाहत में बर्बाद है
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
कोई ना सुने सिसकती आँहों को
कोई ना धरे तड़पती बाहों को
आधी आधी पूरी ख्वैशें
टूटी फूटी सब फरमाइशें
कहीं शक हैं कहीं नफरत की दीवार है
कहीं जीत में भी शामिल पलपल हार हैं
या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो या रब्बा दे दे कोई जान भी अगर
दिलबर पे हो ना, दिलबर पे हो ना कोई असर
हो ओ ओ प्यार है या सज़ा, ए मेरे दिल बता
टूटता क्यूँ नहीं दर्द का सिलसिला
हो ओ ओ ओ हो ओ ओ ओ
ना पूछो दर्द बन्दों से
हंसी कैसी ख़ुशी कैसी
मुसीबत सर पे रहती हैं
कभी कैसी कभी कैसी
हो ओ ओ ओ रब्बा, रब्बा हो ओ ओ हो
रब्बा हो ओ ओ हो, हो ओ ओ ओ रब्बा
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