Wednesday, April 28, 2021

ओ बालाजी क़द म्हारि अरज़ सुनो ला

ओ बालाजी क़द म्हारि अरज़ सुनो ला
अरज़ सुनोला म्हारि विनती सुनोला बजरंग अरज़ सुनोला।

सारी-सारी रात म्हाने नींद कोनी आव, बजरंग नींद कोनी आव,
जद जागूँ म्हारो जीव घबराव, बजरंग जीव घबराव,
म्हारा बालाजी क़द म्हारि पीड हरोला।
ओ बालाजी क़द म्हारि अरज़ सुनोला।

गहरी-गहरी नादियाँ, न्याव पुरानी, म्हारि न्याव पुरानी
सिर के ऊपर चल रयो पाणि, म्हारे फिर रयो पानी
म्हारा बालाजी क़द म्हारि पार करोला,
म्हारा बालाजी क़द म्हारि अरज सुनोला।

तुम सा दीन दयालु नहीं है, दीनानाथ नहीं है,
मुझसा दीन अनाथ नहीं है, दीन अनाथ नहीं है,
म्हारा बालाजी क़द म्हारि सहाय करोला,
म्हारा बालाजी क़द म्हारि अरज़ सुनोला।

दास प्रेम थारा गुण गाव, बजरंग थारा गुण गाव,
बार-बार चरणा म शीश नवाव, चरणा म शीश नवाव,
म्हारा बालाजी क़द सिर पर हाथ धरोला,
म्हारा बालाजी क़द म्हारि अरज़ सुनो ला।
(समाप्त)

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