Mann Ki Titliyaan Lyrics in Hindi – Mahika Bheda

 फिर से रूप के मोती चुनेंगे

आ.. फिर से ख्वाब एक ऐसा बुनेंगे

तेरी उड़ाने तुझको पुकारे

खोल के पंख उड़ने को चाहे

ये मन की तितलियां

ये मन की तितलियां

संभलती है कहां

ये मन की तितलियां

ये मन की तितलियां

संभलती है कहां

ये मन की तितलियां

आसमान को नापना बाकी

बादलों की चादरों से

ओ मेहरबान है ये हवाएं

क्यों डरें कि मुश्किलों से

कैसी उम्मीदें दौड़ी ये जाए

खोल के पंख उड़ने को चाहे

ये मन की तितलियां

ये मन की तितलियां

संभलती है कहां

ये मन की तितलियां

ये मन की तितलियां

संभलती है कहां

ये मन की तितलियां


अपना ना दरिया, अपनी ना बारिश

थोड़ी सी खुशियां, अपनी ये ख्वाहिश

रिश्तो के धागे पैरों से बांधे

रिश्ते ये भागे ख्वाबों से आगे

चुनता है कोई कैसे ये राहें

खोल के पंख उड़ने को चाहे

ये मन की तितलियां

ये मन की तितलियां

संभलती है कहां

ये मन की तितलियां

ये मन की तितलियां

संभलती है कहां

ये मन की तितलियां



Comments

Popular Lyrics / Posts

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं aa laut ke aaja hanuman tumheshree ram bulate hain

तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ

जिस भजन में राम का नाम ना हो jis bhajan me ram ka naam na ho us bhajan ko gana na chahiye