Prem Ki Leela Lyrics in Hindi – Irshad Kamil
कोई डोरी खींचे मोरी, चलूँ जैसे आंधी
पिया जी ने मोरे सीने ऐसे डोरी बाँधी
इतर-उतर डोले जिया, अंग-अंग बाँध के अब
बस में नहीं मैं आज रे
प्रेम की लीला कर, तू काहे मन मोरा मोहे
प्रेम की लीला कर, तू काहे मन मोरा मोहे
सांवरी हो गई मैं, बावरी हो गई मैं
अंग-अंग से, गूँजे मन से धीरे से, धीरे से
कान्हा रे तेरी मैं
कान्हा रे तेरी मैं
कान्हा रे तेरी मैं
हम्म सावन फुहारों में
जो बन इशारों में
कहता है हमसे करो प्रेम जी भर
पल में शिवालों सा
पल में उजालों सा
बहता है जिया करो प्रेम जी भर
डूब तन-मन में
मोह उपवन में
पग-पग आओ चले साथ प्रियतम
ले जा मोहे चाहे सदियों से आगे
तेरे पीछे नैना मूँदे चलूँगी सदा
एक धुन है अधूरी, कर देना पूरी
होले-हल्के से करो दूर ये दूरी
पल-पल माना तो है, सब कुछ माँगा तो है
तुझसे मेरी हर आस है
प्रेम की लीला कर, तू काहे मन मोरा मोहे
सांवरी हो गई मैं, बावरी हो गई मैं
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