विनोद अग्रवाल भजन लिरिक्स लिखित : Vinod Agarwal Bhajan Lyrics 2
ओ मेरे गोपाल कन्हैया मोहन मुरली वाले भजन लिरिक्स

ओ मेरे गोपाल कन्हैया
मोहन मुरली वाले
मोहन मुरली वाले
गोपाल मुरलिया वाले
ओ मेरे गोपाल कन्हैंया
मोहन मुरली वाले।।
कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया
गुणवान नहीं धनवान नहीं
कोई बड़ा जगत में मान नहीं
फिर कैसे तुम्हे अपनाऊं रसिया
कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया।।
कोई जप तप संयम नियम नहीं
मेरा गोपियों जैसा प्रेम नहीं
फिर कैसे तुम्हे रिझाऊं रसिया
कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया।।
कोई गुण का बड़ा भंडार नहीं
मेरा मीरा जैसा प्यार नहीं
फिर कैसे तुम्हे मनाऊं रसिया
कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया।।
मेरे भीलनी जैसे बेर नहीं
तेरे आने में तो देर नहीं
फिर कैसे भोग लगाऊं रसिया
कहो कैसे तुझे रिझाऊं रसिया।।
ओ मेरे गोपाल कन्हैया
मोहन मुरली वाले
मोहन मुरली वाले
गोपाल मुरलिया वाले
ओ मेरे गोपाल कन्हैंया
मोहन मुरली वाले।।
घनश्याम तुम्हारे मंदिर में मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ लिरिक्स
घनश्याम तुम्हारे मंदिर मेंमैं तुम्हे रिझाने आई हूँ
वाणी में तनिक मिठास नहीं
पर विनय सुनाने आई हूँ।।
मैं देखूं अपने कर्मो को
फिर दया को तेरी करूणा को
ठुकराई हुई मैं दुनिया से
तेरा दर खटकाने आई हूँ
घनश्याम तुम्हारें मंदिर में
मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ।।
प्रभु का चरणामृत लेने को
है पास मेरे कोई पात्र नहीं
आँखों के दोनों प्यालों में
मैं भीख मांगने आई हूँ
घनश्याम तुम्हारें मंदिर में
मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ।।
तेरी आस है श्याम निवाणीअणु
तेरी शान है बिगड़ी बना देना
तुम स्वामी हो मैं दासी हूँ
संबंध बढ़ाने आई हूँ
घनश्याम तुम्हारें मंदिर में
मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ।।
समझी थी मैं जिन्हें अपना
सब हो गए आज बेगाने है
सारी दुनिया को तज के प्रभु
तुझे अपना बनाने आई हूँ
घनश्याम तुम्हारें मंदिर में
मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ।।
घनश्याम तुम्हारे मंदिर में
मैं तुम्हे रिझाने आई हूँ
वाणी में तनिक मिठास नहीं
पर विनय सुनाने आई हूँ।।
छबीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए भजन लिरिक्स

छबीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए
ब्याहन जाए वो तो ब्याहन जाए
रंगीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए
छबीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए।।
मेरे कान्हा के सर मुकुट बिराजे
चितवन चित्त चुराए
छबीलो मेरो ब्याहन जाए।।
मेरे कान्हा के गल मोतियन माला
वो तो चूमत चरणन जाए
छबीलो मेरो ब्याहन जाए।।
मेरो कान्हा मानो कमल मधुमय
मधुकर रहे मंडराए
छबीलो मेरो ब्याहन जाए।।
मेरे कान्हा के होंठ पान की लाली
बोलत फूल झराए
छबीलो मेरो ब्याहन जाए।।
मेरो कान्हा छवि रूप पिटारी
वो तो कोटिन काम लजाये
छबीलो मेरो ब्याहन जाए।।
मेरे कान्हा के मन लगी चटपटी
वो तो राधा जू को मन ललचाये
छबीलो मेरो ब्याहन जाए।।
छबीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए
ब्याहन जाए वो तो ब्याहन जाए
रंगीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए
छबीलो मेरो कान्हा ब्याहन जाए।।
अपने लाला की सुन लो शिकायत जो बताने के काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लो शिकायतजो बताने के काबिल नहीं है
वो जो देता है दर्द ये दिल को
वो दिखाने के काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लों शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है।।
मैया पहली शिकायत हमारी
पनघट पे मिले थे मुरारी
या ने तोड़ी गगरिया हमारी
जल भरने के काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लों शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है।।
मैया दूसरी शिकायत हमारी
गलियों में मिले थे मुरारी
वा ने फाड़ी चुनरिया हमारी
ओढ़ने के जो काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लों शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है।।
मैया तीसरी शिकायत हमारी
महलों में मिले थे मुरारी
या ने तोड़ी नथनिया हमारी
मुंह दिखाने के काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लों शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है।।
मेरे लाला को प्यार सु बुलाती
माखन मिश्री का भोग लगाती
ये तो प्राणो से प्यारा कन्हैया
ये शिकायत के काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लों शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है।।
अपने लाला की सुन लो शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है
वो जो देता है दर्द ये दिल को
वो दिखाने के काबिल नहीं है
अपने लाला की सुन लों शिकायत
जो बताने के काबिल नहीं है।।
श्याम ऐसो जिया में समाए गयो री भजन लिरिक्स
श्याम ऐसो जिया मेंसमाए गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
सोहनी सूरत माधुरी मूरत
सोहनी सूरत माधुरी मूरत
मोहे एक झलक
दिखाय गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
चोरी चोरी चुपके चुपके
चोरी चोरी चुपके चुपके
मोहे यमुना के तट पे
बुलाय गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
आवरी बावरी कर गयो री मोहे
आवरी बावरी कर गयो री मोहे
चित्त को मेरे
चुराय गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
मनवा मोरा नहीं मेरे वश में
मनवा मोरा नहीं मेरे वश में
वो मन को मेरे
लुभाय गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
आकुल व्याकुल फिरूं भवन में
आकुल व्याकुल फिरूं भवन में
वो तो प्रेम को रोग
लगाय गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
कहा कहूँ सखी कैसे बताऊँ
कहा कहूँ सखी कैसे बताऊँ
वो तो मोहे अपनों
बनाय गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
श्याम ऐसो जिया में
समाए गयो री
मेरे तन मन की
सुधबुध भुलाय गयो री।।
जो तुमको भूल जाए वो दिल कहाँ लाऊँ भजन लिरिक्स

जो तुमको भूल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ
दिल है तो दिल में क्या है
कैसे तुम्हे बताऊँ
जो तुमको भुल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ।।
मेरे दिल का राज गम है
तू है बेनियाज गम से
तुझे अपने दर्दे दिल की
तुझे अपने दर्दे दिल की
क्या दास्ताँ सुनाऊं
जो तुमको भुल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ।।
नही अब रहा भरोसा
मदहोश जिन्दगी का
तेरी याद के नशे में
तेरी याद के नशे में
कही राह में गिर ना जाऊं
जो तुमको भुल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ।।
मेरे दिल की बेबसी में
अरमान थक गए है
तेरी राह पे नजर है
तेरी राह पे नजर है
कही और चल ना पाऊं
जो तुमको भुल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ।।
मुझे याद तुम हो लेकिन
मुझे याद भी है अपनी
कभी यूँ भी याद आओ
कभी यूँ भी याद आओ
की मैं खुद को भूल जाऊं
जो तुमको भुल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ।।
जो तुमको भूल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ
दिल है तो दिल में क्या है
कैसे तुम्हे बताऊँ
जो तुमको भुल जाए
वो दिल कहाँ लाऊँ।।
आप क्या जानो ऐ श्याम सुन्दर भजन लिरिक्स
आप क्या जानो ऐ श्याम सुन्दरकैसे तुम बिन जिए जा रहे हैं
तेरे मिलने की उम्मीद लेकर
गम के आंसूं पिए जा रहें हैं।।
ये जुदाई सहेंगे श्याम कब तक
बिन दर्शन रहेंगे श्याम कब तक
दुनिया से हो गए हैं बेगाने
तेरा नाम लिए जा रहें हैं
आप क्या जानो ए श्यामसुन्दर
कैसे तुम बिन जिए जा रहें हैं।।
श्याम सुन्दर कहाँ खो गए हो
इतने बेदर्द क्यों हो गए हो
आप की बेवफाई के सदके
लोग ताने दिए जा रहे हैं
आप क्या जानो ए श्यामसुन्दर
कैसे तुम बिन जिए जा रहें हैं।।
याद आती है आती रहेगी
याद तेरी सताती रहेगी
जितना जी चाहे तड़पालों हमको
तेरी पूजा किये जा रहें हैं
आप क्या जानो ए श्यामसुन्दर
कैसे तुम बिन जिए जा रहें हैं।।
किन गुनाहों की है ये सजाएं
श्याम सुन्दर हमे कुछ बताएं
टुकड़े टुकड़े किया है दिल मेरा
प्यार तुमसे किये जा रहें हैं
आप क्या जानो ए श्यामसुन्दर
कैसे तुम बिन जिए जा रहें हैं।।
आप क्या जानो ऐ श्याम सुन्दर
कैसे तुम बिन जिए जा रहें हैं
तेरे मिलने की उम्मीद लेकर
गम के आंसूं पिए जा रहें हैं।।
किस से नजर मिलाऊँ तुम्हे देखने के बाद भजन लिरिक्स : Kisse Nazar Milau Tujhe Dekhne Ke Baad

किस से नजर मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद
आँखों में ताबे दीद अब
बाकी नहीं रहा
किससें नज़र मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद।।
सारे देवतों का एहतराम भी
मेरी निगाह में है
किस किस को सर झुकाऊं
तुम्हे देखने के बाद
किससें नज़र मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद।।
है लुत्फ़ बस इसी में
मज़ा इसी में है
अपना पता ना पाऊं
तुम्हे देखने के बाद
किससें नज़र मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद।।
मेरा एक तू ही तू है
दिलदार प्यारे कान्हा
झोली कहां फैलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद
किससें नज़र मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद।।
प्यारे ये प्यार तेरा
महफ़िल में खींच लाया
महबूब ये प्यार तेरा
महफ़िल में खींच लाया
दिलबर ये प्यार तेरा
महफ़िल में खींच लाया
दिल की किसे सुनाऊं
तुम्हे देखने के बाद
किससें नज़र मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद।।
किस से नजर मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद
आँखों में ताबे दीद अब
बाकी नहीं रहा
किससें नज़र मिलाऊँ
तुम्हे देखने के बाद।।
अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाए जा भजन लिरिक्स

अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाए जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
तो बिन मोहन चैन पड़े ना
नैनो से उलझाए नैना
मेरी अखियन बिच समाए जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
बेदर्दी तोहे दर्द ना आवे
काहे जले पे लोण लगावे
लागा प्रेम का रोग मिटाए जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
टेढ़ी धरी तेने मुख पे मुरलिया
टेढ़ो तू चितचोर सांवरिया
टेढ़ी नजरों के तीर चलाय जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
काहे तो संग प्रीत लगाई
निष्ठुर निकला तू हरजाई
लागा प्रीत का रोग मिटाए जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
मुरली अधरन धर मुसकावे
घायल कर क्यों नैन चुरावे
टेढ़ी नजरों के तीर चलाय जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
अपना चंदा सा मुखड़ा दिखाए जा
मोर मुकुट वारे घुंघराली लट वारे।।
कन्हैया को एक रोज रो के पुकारा भजन लिरिक्स

कन्हैया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
मेरे साथ होता है प्रतिक्षण तमाशा
है आंखों में आंसू और दिल में निराशा
कई जन्मों से पथ पे पलकें बिछाई
ना पूरी हुई एक भी दिल की आशा
सुलगती विरह की करो आग ठंडी
भटकती लहर को दिखा दो किनारा
कन्हैंया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
कभी बांसुरी लेके इस तट पे आओ
कभी बनके घन मन के अंबर पे छाओ
बुझा है मेरे मन की कुटिया का दीपक
कभी करुणा दृष्टि से इसको जलाओ
बता दो कभी अपने श्री मुख कमल से
कहाँ खोजने जाऊँ अब और सहारा
कन्हैंया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
कुछ है जो हुस्न पे नाज करते हैं
कुछ है जो दौलत पे नाज करते हैं
मगर हम गुनहगार बन्दे है ऐ कन्हैया
सिर्फ तेरी रहमत पे नाज करते है।
कभी मेरी बिगड़ी बनाने को आओ
कभी सोये भाग जगाने तो आओ
कभी मन की निर्बलता को बक्शों शक्ति
कभी दिल का साहस बढ़ाने तो आओ
कभी चरण अपने धुलाओ तो जानू
बहा दी है नैनों से जमुना की धारा
कन्हैंया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
लटकते हुए बीत जाए ना जीवन
भटकते हुए बीत जाए ना जीवन
चौरासी के चक्कर में हे चक्रधारी
भटकते हुए बीत जाए ना जीवन
संभालो ये जीवन ऐ जीवन के मालिक
मेरा कुछ नहीं आप जीते मैं हारा
कन्हैंया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
कहो और कब तक रिझाता रहूं मैं
बदल कर नए वेश आता रहूं मैं
कथा वेदना की सुनते सुनाते
हरे घाव दिल के दिखाता रहूं मैं
ना मरहम लगाओ ना हंस कर निहारो
कहो किस तरह होगा अपना गुजारा
कन्हैंया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
कन्हैया को एक रोज रो के पुकारा
कृपा पात्र किस दिन बनूँगा तुम्हारा।।
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