विनोद अग्रवाल भजन लिरिक्स लिखित : Vinod Agarwal Bhajan Lyrics 4
फूलों में सज रहे हैं श्री वृन्दावन बिहारी भजन लिरिक्स : Phoolon Mein Saj Rahe Hain Lyrics

फूलों में सज रहे हैं
श्री वृन्दावन बिहारी
और साथ सज रही है
वृषभानु की दुलारी।।
टेढ़ा सा मुकुट सर पर
रखा है किस अदा से
करुणा बरस रही है
करुणा भरी निगाह से
बिन मोल बिक गयी हूँ
जब से छबि निहारी
फूलों में सज रहे है
श्री वृन्दावन बिहारी।।
बहियाँ गले में डाले
जब दोनों मुस्कुराते
सब को ही प्यारे लगते
सब के ही मन को भाते
इन दोनों पे मैं सदके
इन दोनों पे मैं वारी
फूलों में सज रहे है
श्री वृन्दावन बिहारी।।
श्रृंगार तेरा प्यारे
शोभा कहूँ क्या उसकी
इत पे गुलाबी पटका
उत पे गुलाबी साड़ी
फूलों में सज रहे है
श्री वृन्दावन बिहारी।।
नीलम से सोहे मोहन
स्वर्णिम सी सोहे राधा
इत नन्द का है छोरा
उत भानु की दुलारी
फूलों में सज रहे है
श्री वृन्दावन बिहारी।।
टेढ़ी सी तेरी चितवन
हर एक अदा है बांकी
बांके के बांके नैना
मारे जिगर कटारी
फूलों में सज रहे है
श्री वृन्दावन बिहारी।।
चुन चुन के कलिया जिसने
बंगला तेरा बनाया
दिव्य आभूषणों से
जिसने तुझे सजाया
उन हाथों पे मैं सदके
उन हाथों पे मैं वारी
फूलों में सज रहे है
श्री वृन्दावन बिहारी।।
फूलों में सज रहे हैं
श्री वृन्दावन बिहारी
और साथ सज रही है
वृषभानु की दुलारी।।
ना जी भर के देखा ना कुछ बात की लिरिक्स : Na Ji Bhar Ke Dekha Na Kuch Baat Ki Vinod Agarwal Lyrics

ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की
करो दृष्टि अब तो, प्रभु करुणा की
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
गए जब से मथुरा वो, मोहन मुरारी
सभी गोपियाँ बृज में, व्याकुल थी भारी
कहा दिन बिताया, कहाँ रात की
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
चले आओ अब तो, ओ प्यारे कन्हैया
यह सूनी है कुंजन, और व्याकुल है गईया
सूना दो इन्हें अब तो, धुन मुरली की
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
हम बैठे हैं गम उनका, दिल में ही पाले
भला ऐसे में खुद को, कैसे संभाले
ना उनकी सुनी, ना कुछ अपनी कही
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
तेरा मुस्कुराना, भला कैसे भूलें
वो कदमन की छैया, वो सावन के झूले
ना कोयल की कू-कू, ना पपीहा की पी
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
तमन्ना यही थी की, आएंगे मोहन
मैं चरणों में वारुंगी, तन मन यह जीवन
हाय मेरा कैसा ये, बिगड़ा नसीब
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
ना जी भर के देखा, ना कुछ बात की
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की
करो दृष्टि अब तो, प्रभु करुणा की
बड़ी आरजू थी, मुलाक़ात की।।
हर सांस मे हो सुमिरन तेरा यु बित जाये जीवन मेरा भजन लिरिक्स

हर सांस मे हो सुमिरन तेरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा
तेरि पुजा करते बिते सांझ सवेरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा।।
नैनो कि खिड़की से तुमको
पल पल मैं निहारु
मन में बिठा लूँ तेरी आरती उतारु
डाले रहूँ तेरे चरणों में डेरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा।।
जो भी तेरा प्यारा हो वो
मेरे दिल का प्यारा हो
मेरे सर का ताज मेरी आँखों का तारा हो
सब में निहारु रूप सुनहरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा।।
प्यार हो सत्कर हो
एतबार हो तुम्हारा
सुख भी हो सारे और
याद हो इशारा
हो आत्मा पे तेरा ही डेरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा।।
हर सांस मे हो सुमिरन तेरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा
तेरि पुजा करते बिते सांझ सवेरा
यूँ बित जाये जीवन मेरा।।
छुपे बैठे हो कण कण मे भला मे केसे पहचानु भजन लिरिक्स

छुपे बैठे हो कण कण मे
भला मैं कैसे पहचानु
दुई का दूर कर पर्दा
सामने आओ तो जानु।।
छुपे माया के पर्दे मे
क्या मुझसे शर्म आती है
ये घुंघट दर्मिया पर्दा
हटा दोगे तो मैं जानु
दुई का दूर कर पर्दा
सामने आओ तो जानु।।
सुना है चाहने वालों से
हसीनों से हसीं हो तुम
तो चेहरे से जरा चिल्मन
हटा दोगे तो मैं जानु
दुई का दूर कर पर्दा
सामने आओ तो जानु।।
ये सुरज चांद से ज्यादा
अजब जो नूर हे तेरा
मेरे दिल में वही ज्योति
जगा दो तो मैं जानु
दुई का दूर कर पर्दा
सामने आओ तो जानु।।
अंधेरी रात कत्ति दूर
नैय्या भी भंवर मे है
मेरी नैया किनारे से
लगा दोगे तो मैं जानु
दुई का दूर कर पर्दा
सामने आओ तो जानु।।
छुपे बैठे हो कण कण मे
भला मैं कैसे पहचानु
दुई का दूर कर पर्दा
सामने आओ तो जानु।।
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता भजन लिरिक्स

अगर प्यार तेरे से पाया ना होता
तुझे श्याम अपना बनाया ना होता।।
ना होती तमन्ना हि, तेरे मिलन की
अगर मेरे मन को तु, भाया ना होता
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता।।
लबो पे तेरा ये, तरना ना होता
अगर तीर दिल से, चलाया ना होता
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता।।
ना फिरती मैं तेरे, लिए मारि मारि
अगर तुने खुद ही, रुलाया ना होता
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता।।
तो मै भी निराशा में, आशा ना रखती
किसी के लिये गर तु, आया ना होता
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता।।
ये बेदर्द दुनिया, मुझे कुछ तो कहती
अगर तुने दिल से, बुलाया ना होता
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता।।
अगर प्यार तेरे से पाया ना होता
तुझे श्याम अपना बनाया ना होता।।
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