चली गई माल दुलारी तजी न थारी
सोयो पाव पसारी तजी न थारी
(१) जिसकी जान थारा पास नही रे,
सोना क दियो रे गमाई(हो रामा)
भरम भंभू का उठण लाग्या
नोटीश प नोटीश जारी...
तजी न थारी...
(२) बृम्ह कचेरी म बृम्ह का वासा,
गीत का मुजरा लेई(हो रामा)
नव नाड़ी और बावन कोठड़ी
अंत बिराणी होय...
तजी न थारी...
(३) जब हो दिवानी ने दफ्तर खोला,
नही शरीर नही श्वास(हो रामा)
माता छटी ने डोर रचीयो है
रती फरक नही आव...
तजी न थारी...
(४) हिम्मत का हाल टुटी गया रे,
रयि हमेशा रोई
सतगुरु राखा अभी ले जाजो
नही तो चैरासी का माही...
तजी न थारी...
(५) कहत कबीर सुणो भाई साधो,
यो पद है निरबाणी(हो रामा)
यही रे पंथ की करो खोजना
रही जासे नाम निसाणी...
तजी न थारी...
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