देवकी नंदन ठाकुर भजन लिरिक्स लिखित : Devki Nandan Bhajan Lyrics 1
मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरे वीर : Main To Govardhan Ko Jau Mere Veer Lyrics

मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा
नहीं माने मेरो मनवा
नहीं माने मेरो मनवा
मैं तो गोवर्धन को जाऊँ मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा।।
सात कोस दे परिकम्मा
मैं तो मानसी गंगा नहाऊं मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा
मैं तो गोवर्धन को जाऊँ मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा।।
सात सेर की करी रे करियां
मैं तो संतन न्यौत जिमाऊं मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा
मैं तो गोवर्धन को जाऊँ मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा।।
चन्द्रसखी भज बालकृष्ण छवि
मैं तो हरि दर्शन को पाऊँ मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा
मैं तो गोवर्धन को जाऊँ मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा।।
मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा
नहीं माने मेरो मनवा
नहीं माने मेरो मनवा
मैं तो गोवर्धन को जाऊँ मेरे वीर
नहीं माने मेरो मनवा।।
हरि की अंत समय याद आई : Hari Ki Ant Samay Yaad Aayi Lyrics

हरि की अंत समय याद आई
कोई ना मेरा
मैं ना किसी का
सबसे ठोकर खाई
हरी की अंत समय याद आई।।
सारा जीवन पत्नी को
अपने गले लगाया
बेटों की खातिर मैंने अपना
सारा जीवन गंवाया
छोड़ चले गए बीच भंवर में
छोड़ चले गए बीच भंवर में
इनको दया ना आई
हरी की अंत समय याद आई।।
मैं खोया था मोह माया में
जीवन व्यर्थ गंवाया
कोई किसी का हुआ ना जग में
आज समझ में आया
अहंकार पल भर में टूटा
अहंकार पल भर में टूटा
मेरी ताकत काम न आई
हरी की अंत समय याद आई।।
तुम जीवन दाता हो मेरे
तुम ही पालनहारी
जिसकी रक्षा तुम प्रभु करते
कौन उसे फिर मारे
बीच भंवर में तुझे पुकारूं
बीच भंवर में तुझे पुकारूं
आ जाओ यदुराई
हरी की अंत समय याद आई।।
हरि की अंत समय याद आई
कोई ना मेरा
मैं ना किसी का
सबसे ठोकर खाई
हरी की अंत समय याद आई।।
तुम्हे वंदना तुम्हें वंदना भजन लिरिक्स

तुम्हे वंदना तुम्हें वंदना
हे बुद्धि के दाता
सब वेदों के ज्ञाता
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना।।
एक दंत दयावंत
चार भुजा धारी
माथे पे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी
मैया तुम्हे बुलाए
गोरा तुम्हे बुलाए
कह कह के ललना
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना।।
पान चढ़े फूल चढ़े
और चढ़े मेवा
लड्डअन का भोग लगे
संत करें सेवा
भोले बाबा तुम्हें झुलावे
शंकर बाबा तुम्हें झुलावे
रेशम के पलना
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना।।
अंधन को आंख देत
कोडिन को काया
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया
भक्तों की विनती को
दीनों की विनती को
अब गणपति जी सुनना
तुम्हें वंदना है तुम्हें वंदना।।
तुम्हे वंदना तुम्हें वंदना
हे बुद्धि के दाता
सब वेदों के ज्ञाता
तुम्हें वंदना तुम्हें वंदना।।
लाल समझाए ले मैया है नटखट तेरो कन्हैया लिरिक्स

लाल समझाए ले मैया
है नटखट तेरो कन्हैया
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री।।
झटकी चुनरिया लचका
गयो है कमरिया
मांगे दधि को दान कान्हा
बिच ही डगरिया
श्याम ने आय के घेरी
कलाई पकड़ी मेरी
बहियाँ मरोड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री।।
चोरी चोरी करे घर घर छेला
नेक लाज आवे ना
सिर पे चढायो तेने
नेक समझावे ना
सांवरो गिरवर धारी
चोर है मदन मुरारी
सजन चित चोर गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री।।
बांकी अदा पे लूट गई
मैं तो श्याम प्यारे की
दिल में बसी सुरतिया
तेरे कनुवा कारे की
रही ना सुध बुध तन की
दशा ऐसी भई मन की
तड़पती छोड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री।।
लाल समझाए ले मैया
है नटखट तेरो कन्हैया
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री
आज मोहे छेड़ गयो री
मटुकिया फोड़ गयो री।।
सुखी बसे संसार सब दुखिया रहे ना कोय लिरिक्स

सुखी बसे संसार सब
दुखिया रहे ना कोय
यह अभिलाषा हम सब की
भगवन पूरी होय
विद्या बुद्धि तेज बल
सबके भीतर होय
दूध पूत धन धान्य से
वंचित रहे न कोय।।
आपके भक्ति प्रेम से
मन होवे भरपूर
राग द्वेष से चित्त मेरा
कोसो भागे दूर
मिले भरोसा आपका
हमें सदा जगदीश
आशा तेरे नाम की
बनी रहे मम ईश।।
पाप से हमें बचाइये
करके दया दयाल
अपना भक्त बनाय के
सबको करो निहाल
दिल में दया उदारता
मन में प्रेम अपार
हृदय में धारु धीरता
हे मेरे करतार
हाथ जोड़ विनती करूँ
सुनिए कृपा निधान
साधु संगत सुख दीजिए
दया धर्म का दान
दीजे दया धर्म का दान
दीजे दया धर्म का दान।।
सुखी बसे संसार सब
दुखिया रहे ना कोय
यह अभिलाषा हम सब की
भगवन पूरी होय
विद्या बुद्धि तेज बल
सबके भीतर होय
दूध पूत धन धान्य से
वंचित रहे न कोय।।
मदन गोपाल शरण तेरी आयो भजन लिरिक्स

मदन गोपाल शरण तेरी आयो
चरण कमल की सेवा दीजै
चेरो करि राखो घर जायो
मदन गोपाल शरण तेरी आयों।।
धनि-धनि मात पिता सुत बन्धु
धनि जननी जिन गोद खिलायो
मदन गोपाल शरण तेरी आयों।।
धनि-धनि चरण चलत तीरथ को
धनि गुरु जिन हरिनाम सुनायो
मदन गोपाल शरण तेरी आयों।।
जे नर बिमुख भये गोविन्द सों
जनम अनेक महा दुःख पायो
मदन गोपाल शरण तेरी आयों।।
‘श्री भट्ट’ के प्रभु दियो अभय पद
यम डरप्यो जब दास कहायो
मदन गोपाल शरण तेरी आयों।।
मदन गोपाल शरण तेरी आयो
चरण कमल की सेवा दीजै
चेरो करि राखो घर जायो
मदन गोपाल शरण तेरी आयों।।
हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा मेरे इन होठों पे हैं भजन लिरिक्स

हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा
मेरे इन होठों पे हैं
नाम प्रियाकांत प्यारा
मेरे इन होठों पे हैं।।
बांकी छवि बांकी अदा
बांकी हंसी बांका चलन
रूबरू बांका नज़ारा
मेरे इन होठों पे हैं
नाम प्रियाकांत प्यारा
मेरे इन होठों पे हैं।।
एक सूरत आपकी
और दीवाना सारा जहां
हाल जो होगा हमारा
मेरे इन होठों पे हैं
नाम प्रियकांत प्यारा
मेरे इन होठों पे हैं।।
मेरी आँखों में कटीली
अपनी आँखे डालकर
जो किया तुमने इशारा
मेरे इन होठों पे हैं
नाम प्रियकांत प्यारा
मेरे इन होठों पे हैं।।
हर घड़ी सुमिरन तुम्हारा
मेरे इन होठों पे हैं
नाम प्रियाकांत प्यारा
मेरे इन होठों पे हैं।।
हमने ब्रज के ग्वाले से अपना दिल लगाया है भजन लिरिक्स

हमने ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है
नींद भी गवाई है
चैन भी गवाया है
हमनें ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है।।
दिल मेरा बेकाबू
हो जाता है उस पर
देखता है मेरी तरफ
और मुस्कुराता है
हमनें ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है।।
कई बार चाहा उसे
हाले दिल सुनाऊ मैं
होंठ मेरे खुल ना सके
सामने जो आया है
हमनें ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है।।
सब ये समझते है
वो बांसुरी बजाता है
पर उसने इशारों से
हमको बुलाया है
हमनें ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है।।
हमने ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है
नींद भी गवाई है
चैन भी गवाया है
हमनें ब्रज के ग्वाले से
अपना दिल लगाया है।।
तू राधे राधे गाले और झूम ले मस्ती में भजन लिरिक्स

तू राधे राधे गाले
और झूम ले मस्ती में
छोटा सा घर बना ले
गोविन्द की बस्ती
तु राधें राधें गाले
और झूम ले मस्ती में।।
दीवानो आ के देखो
क्या धूम मच रही है
राधा के नाम की अब
ये धारा बह रही है
आ झूम झूम के अब
ये कहते है मस्ती में
छोटा सा घर बना ले
गोविन्द की बस्ती
तु राधें राधें गाले
और झूम ले मस्ती में।।
श्यामा के दर पे आके
कोई ना जाए खाली
करके कृपा किशोरी
भर देगी झोली खाली
तुझको सुकुन मिलेगा
श्री राधे की मस्ती में
छोटा सा घर बना ले
गोविन्द की बस्ती
तु राधें राधें गाले
और झूम ले मस्ती में।।
एक बार हाथ थामो
ब्रज स्वामीनी हमारा
कितने गुनाह किए है
गुनेहगार हूँ तुम्हारा
करके कृपा उठा लो
आया तेरी बस्ती में
छोटा सा घर बना ले
गोविन्द की बस्ती
तु राधें राधें गाले
और झूम ले मस्ती में।।
तू राधे राधे गाले
और झूम ले मस्ती में
छोटा सा घर बना ले
गोविन्द की बस्ती
तु राधें राधें गाले
और झूम ले मस्ती में।।
श्री गोवर्धन महाराज महाराज लिरिक्स : Shri Govardhan Maharaj Lyrics

श्री गोवर्धन महाराज महाराज
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े
तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।
तेरे कानन कुंडल साज रहे
तेरे कानन कुंडल साज रहे
ठोड़ी पे हिरा लाल, ओ लाल
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।
तेरे गले में कंठा सोने को
तेरे गले में कंठा सोने को
तेरी झांकी बनी विशाल, विशाल
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।
तेरी सात कोस की परिक्रमा
तेरी सात कोस की परिक्रमा
और चकलेश्वर विश्राम, विश्राम
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो
श्री गोंवर्धन महाराज महाराज
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।
श्री गोवर्धन महाराज महाराज
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो।।
//श्री गिरिराज धरण की जय//
Comments
Post a Comment