देवकी नंदन ठाकुर भजन लिरिक्स लिखित : Devki Nandan Bhajan Lyrics 5
मेरे कष्ट तू मिटा दे दुनिया बनाने वाले भजन लिरिक्स

मेरे कष्ट तू मिटा दे
दुनिया बनाने वाले
यह डोर जिंदगी की
मेरे श्याम के हवाले।।
मेरा ना और कोई
इस जग में आसरा है
मुझको तलाश तेरी
नैनो में सांवरा है
दर्शन की आरजू है
गैया चराने वाले
मेरे कष्ट तु मिटा दे
दुनिया बनाने वाले।।
दुनिया है मेरी वीरान
मझदार में है नैया
आजा ओ माझी बन कर
मेरी नाव के खिवईया
साँसों में तुम बसे हो
दिल में समाने वाले
मेरे कष्ट तु मिटा दे
दुनिया बनाने वाले।।
जन्नत में भेज चाहे
दोज़ख में भेज दे
हम तो तेरे दीवाने
इक बार देख ले तू
हम को नहीं है परवाह
मुरली बजाने वाले
मेरे कष्ट तु मिटा दे
दुनिया बनाने वाले।।
कण कण में व्यापत है तू
कहता है यह ज़माना
अब मेरी बारी आयी
करते हो क्यों बहाना
मानूंगा मैं तो जब ही
अपने गले लगाले
मेरे कष्ट तु मिटा दे
दुनिया बनाने वाले।।
मेरे कष्ट तू मिटा दे
दुनिया बनाने वाले
यह डोर जिंदगी की
मेरे श्याम के हवाले।।
मुझे दे दर्शन गिरधारी रे भजन लिरिक्स

मुझे दे दर्शन गिरधारी रे
तेरी सांवरी सूरत पे मैं वारि रे।।
जमुना तट हरी धेनु चरावे
मधुर मधुर स्वर वेणु बजावे
तेरी काँधे कमरिया कारी रे॥
मुझे दे दर्शन गिरधारी रे
तेरी सांवरी सूरत पे मैं वारि रे।।
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे
देख रूप मुनि गण मन मोहे
तेरे कुंडल की छवि नयारी रे॥
मुझे दे दर्षन गिरधारी रे
तेरी सांवरी सूरत पे मैं वारि रे।।
वृन्दावन में रास रचावे
गोप गोपिका संग मिल गावे
तेरे नुपुर की धुन प्यारी रे॥
मुझे दे दर्षन गिरधारी रे
तेरी सांवरी सूरत पे मैं वारि रे।।
भक्त हेतु हरी रूप बनाया
ब्रह्मानन्द मेरे मन भाया
औ तेरे चरण कमल बलिहारी रे॥
मुझें दे दर्शन गिरधारी रे
तेरी सांवरी सूरत पे मैं वारि रे।।
तेरी बंसी पे जाऊं बलिहार रसिया हिंदी भजन लिरिक्स

तेरी बंसी पे जाऊं बलिहार रसिया
मैं तो नाचुँगि बीच बजार रसिया।।
ओढ़ के आई मैं तो लाल चुनारिया
मटकी उठा के मैं तो बनी रे गुजरिया
मैं तो कर आई सोलह श्रृंगार रसिया
मैं तो नाचूंगी बीच बजार रसिया।।
तेरे लिये मैंने सब जग छोड़ा
प्यारा सा रिश्ता मैंने तुझसे जोड़ा
हो गया है तुमसे तो प्यार रसिया
मैं तो नाचूंगी बीच बजार रसिया।।
तेरे पीछे मैं तो आई रे अकेली
बड़े गोप की नयी नवेली
आई हूँ करने मनोहार रसिया
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया।।
जब से लगी है तेरी लगनवा
बिसर गयो मोहे घर आंगनवा
मैं तो छोड़ आई सारा संसार रसिया
मैं तो नाचूंगी बीच बाज़ार रसिया।।
तेरी बंसी पे जाऊं बलिहार रसिया
मैं तो नाचुँगि बीच बजार रसिया।।
पत्थर की राधा प्यारी पत्थर के कृष्ण मुरारी भजन लिरिक्स

पत्थर की राधा प्यारी
पत्थर के कृष्ण मुरारी
पत्थर से पत्थर घिस कर
पैदा होती चिंगारी
पत्थर की नारी अहिल्या
पग से श्री राम ने तारी
पत्थर के मठ में बैठी
मां मेरी शेरा वाली
पत्थर की राधा प्यारीं
पत्थर के कृष्ण मुरारी।।
चौदह बरस वनवास को भेजा
राम लखन सीता को पत्थर
रख सीने पे दशरथ ने
पुत्र जुदाई का एक पत्थर
सहा देवकी मां ने कैसी
लीला रचायी कुदरत ने
पत्थर धन्ने के मिला
जिसमे ठाकुर बसा
पत्थर के जगह जगह पर
भोले भंडारी
पत्थर की राधा प्यारीं
पत्थर के कृष्ण मुरारी।।
लै हनुमान गये जो पत्थर
राम लिखा पत्थर पर पत्थर
पानी बीच बहाये
बह गये पत्थर पानी पे
देखा जब सेना ने मेरे
राम बहूत हरषाये
सेतु बांध बना
पत्थर पानी तरा
जिसकी है पूजा करती
दुनिया यह सारी
पत्थर की राधा प्यारीं
पत्थर के कृष्ण मुरारी।।
हनुमान जो लाये पत्थर
संजीवनी लै आये सारे
वीर पुरुष हरषाये
वही पत्थर बृज भूमि में
गोवर्धन कहलाये जो है
उंगली बीच उठाए
पत्थर धन्ने के मिला
जिसमे ठाकुर बसा
पत्थर के जगह जगह पर
भोले भंडारी
पत्थर की राधा प्यारीं
पत्थर के कृष्ण मुरारी।।
पत्थर की राधा प्यारी
पत्थर के कृष्ण मुरारी
पत्थर से पत्थर घिस कर
पैदा होती चिंगारी
पत्थर की नारी अहिल्या
पग से श्री राम ने तारी
पत्थर के मठ में बैठी
मां मेरी शेरा वाली
पत्थर की राधा प्यारीं
पत्थर के कृष्ण मुरारी।।
अब किसी महफ़िल में जाने की हमें फुर्सत नहीं भजन लिरिक्स

अब किसी महफ़िल में जाने
की हमें फुर्सत नहीं
दुनिया वालो को मनाने
की हमें फुर्सत नहीं।।
एक दिल है जिसमे मेरा
बस गया है सांवरा
अब कही दिल को लगाने
की हमें फुर्सत नहीं
अब किसी महफ़िल मे जाने
की हमें फुर्सत नहीं
दुनिया वालो को मनाने
की हमें फुर्सत नहीं।।
ये जो आंखे है हमारी
मिल गयी है श्याम से
अब कही आँखे मिलाने
की हमें फुर्सत नहीं
अब किसी महफ़िल मे जाने
की हमें फुर्सत नहीं
दुनिया वालो को मनाने
की हमें फुर्सत नहीं।।
एक सर है झुक गया जो
आपके दरबार में
अब कही सर को झुकाने
की हमें फुर्सत नहीं
अब किसी महफ़िल मे जाने
की हमें फुर्सत नहीं
दुनिया वालो को मनाने
की हमें फुर्सत नहीं।।
अब किसी महफ़िल में जाने
की हमें फुर्सत नहीं
दुनिया वालो को मनाने
की हमें फुर्सत नहीं।।
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