दूधन भरी तलावड़ी, लोणी बांधी पाळ
वहां भोळा धणियेर न्हावण करऽ
रनुबाई हुआ पणिहार
न्हावतज धोवतऽ मथो मथ्यो, कुणऽ घर जासां मेजवान,
कुणऽ घर अम्बा आमली, कुणऽ घर दाड़िम अनार,
ऊ घर सूखा केवड़ा हो, रनुबाई मेहका लेय।
दूर का अमुक भाई अरजकरऽ, उनऽ घर हुसाँ मेजवान।।
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