काँच कली पहु तोड़थि सजनी गे / मैथिली लोकगीत
काँच कली पहु तोड़थि सजनी गे
लए कोरा बैसाय सजनी गे
अधर सुरा सम पीबथि सजनी गे
यौबन देखि लोभाय सजनी गे
लए भुजपास बान्हि सुनू सजनी गे
जखन करथि बरजोरि सजनी गे
तखनुक गति की कहिय सजनी गे
पहु भेल कठिन कठोर सजनी गे
नहि नहि जौं हम भाखिय सजनी गे
तौं राखय मन रोख सजनी गे
Comments
Post a Comment