अमुक भाई वालई खऽ राखड़ी भरात / निमाड़ी लोकगीत

 अमुक भाई वालई खऽ राखड़ी भरात,

पिया हमखऽ दे राखड़ी घड़ई देव, असी गरमी से।

उंढालई सेज पिया मोहे न सुहाये,

जुदा जुदा पलंग तुलई देव, असी गरमी से।

चौमासा की सेज पिया मोहे न सुहाये,

पिया हमखऽ ते पियर पहुँचई देव, असी गरमी से।

स्याला की सेज पिया बहुत रसालई,

पिया हमखऽ ते हिया सी लगई लेव, इनी गरमी से।

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