अगहन मास लागू नीक पंचमी के दिन / मैथिली लोकगीत

अगहन मास लागू नीक पंचमी के दिन
होइ छनि राम के विवाह जनकपुरमे
पूस मास संक्रान्ति पाहुन केओ नहि आयत
ई सभ लौकिक के व्यवहार कुलरीतियामे
माघ जरकाल ठंढ़ा लागय असाध्य
रामचन्द्र कोना अहाँ जेबै भोरहरियामे
फागुन मास रसदार कहाँ जेबै यो यार
रंग खेलि लीअ जनक नगरिया मे
चैत मास खरमास जड़ि सभ लेल पतझार
रामचन्द्र कोना अहाँ जयबै पतझरिया मे
चढ़ल मास बइसाख उषम बहय बसात
रामचन्द्र कोना अहाँ जयबइ सीता संगियामे
जेठ तपे दिनराति लुक खसय असाध्य
रामचन्द्र अहाँ कोना जयबै दुपहरिया मे
आयल मास अषाढ़ बुन्द बरिसे असाध्य
रामचन्द्र कोना अहाँ जयबै बरसतिया मे
आयल सावन के बहार झूला झूलू यो सरकार
झूला झूलि लिअ रिखि फुलवरियामे
भादव राति अन्हार चारू दिस भरि गेल धार
कोना उतरब पार जलधरियामे
आयल आसिन मास हथिया झटके असाध्य
रामचन्द्र कोना अहाँ जयबै खरखरियामे
कहथिन सखिया हुलास, कातिक पूरल बारहमास
करियनु राम केँ तइयार सुन्न घरियामे

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