हे कमलनयन, हे करुणामय / मैथिली लोकगीत

हे कमलनयन, हे करुणामय, अपराध बहुत हम कयने छी
जौं आन हमर स्वामी रहितथि, नहि जानि की कयने रहितथि
हे केहन भरल अहाँ करुणामय, हम कयक बेर अजमौने छी
सिद्धान्त स्नेहलतासँ करू, भवसिन्धु सँ निश्चय कयने रहितहुँ
हे केहन क्षमा सँ भरल छी अहाँ, हम तकर परीक्षा कयने छी
आम फड़ैत कटहर अमृत घट, पान चुबैत गरल
के केहन भरल अहाँ करूणामय, हम कयक बेर अजमौने छी
अन्य मैथिली लोकगीत

Comments

Popular Lyrics / Posts

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं aa laut ke aaja hanuman tumheshree ram bulate hain

तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ

जिस भजन में राम का नाम ना हो jis bhajan me ram ka naam na ho us bhajan ko gana na chahiye